Harsimrat Kaur Badal appeals to the Education

पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास सिलेबस में पंजाब और सिख इतिहास को शामिल करने की मांग,

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: September 14 2026 01:22:37 PM

शिरोमणि अकाली दल की नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब यूनिवर्सिटी के पोस्टग्रेजुएट इतिहास सिलेबस में पंजाब और सिख समुदाय के समृद्ध इतिहास को सही, विस्तृत और अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की

पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास सिलेबस में पंजाब और सिख इतिहास को शामिल करने की मांग

पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास सिलेबस में पंजाब और सिख इतिहास को शामिल करने की मांग, हरसिमरत कौर बादल ने शिक्षा मंत्री से दखल की अपील

शिरोमणि अकाली दल की नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब यूनिवर्सिटी के पोस्टग्रेजुएट इतिहास सिलेबस में पंजाब और सिख समुदाय के समृद्ध इतिहास को सही, विस्तृत और अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि उन्होंने हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास के पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रम में पंजाब के इतिहास को उचित स्थान दिया जाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने दावा किया कि जब शिरोमणि अकाली दल ने यूनिवर्सिटी के फैसले का विरोध किया था, तब यूनिवर्सिटी की ओर से मौखिक रूप से भरोसा दिया गया था कि पहले वाला फैसला वापस लिया जाएगा। हालांकि, अब पैदा हुए भरोसे के संकट को देखते हुए उन्होंने औपचारिक लिखित आदेश जारी करने की मांग की है।

हरसिमरत कौर बादल की प्रमुख मांगें

हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पंजाब यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की है कि:

  • पहले वाला इतिहास सिलेबस लिखित आदेश के जरिए बरकरार रखा जाए।

  • पंजाब के करीब पांच सदियों के क्षेत्रीय इतिहास को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए।

  • पंजाब और सिख इतिहास की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्ता को मान्यता दी जाए।

  • मौजूदा फैसले तक पहुंचने की परिस्थितियों की जांच करवाई जाए।

  • भविष्य में इतिहास के सिलेबस में इस तरह का बदलाव न करने का लिखित आश्वासन दिया जाए।

हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि पंजाब से जुड़े किसी भी फैसले में पंजाब के हितों, इतिहास और विरासत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब के इतिहास को न तो कमजोर किया जा सकता है और न ही उसके महत्वपूर्ण हिस्सों को हटाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, पंजाब और सिख इतिहास को केवल वैकल्पिक विषय या फुटनोट तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

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