A BSF contingent accorded a Guard of Honour

तिरंगे में लिपटा BSF जवान सतीश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, दिल का दौरा पड़ने से हुई है मौत

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: August 21 2026 09:23:16 PM

तिरंगे में लिपटा BSF जवान सतीश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, दिल का दौरा पड़ने से हुई है मौतBSF की टुकड़ी ने मातमी धुन बजाकर और हवा में फायर कर जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया

तिरंगे में लिपटा bsf जवान सतीश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा दिल का दौरा पड़ने से हुई है मौत

तिरंगे में लिपटा BSF जवान सतीश कुमार का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, दिल का दौरा पड़ने से हुई है मौत

BSF की टुकड़ी ने मातमी धुन बजाकर और हवा में फायर कर जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया

BSF की 176वीं बटालियन में पश्चिम बंगाल में तैनात थे, पार्थिव शरीर पठानकोट स्थित घर लाया 

परिवार के मुताबिक, उन्होंने दौड़ और रेहड़ी पर काम करते हुए अपने सपने को पूरा किया था

तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो परिवार और आसपास के लोगों की आंखें नम हो गईं

पठानकोट 

पठानकोट के सैली कुलियां में शुक्रवार को माहौल गमगीन हो गया, जब 23 वर्षीय BSF जवान सतीश कुमार का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा उनके घर पहुंचा। जवान के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं पूरे इलाके ने अपने लाल की सेवा और बलिदान को गर्व के साथ याद किया। BSF की टुकड़ी ने मातमी धुन बजाकर और हवा में फायर कर जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सतीश कुमार BSF की 176वीं बटालियन में पश्चिम बंगाल में तैनात थे। बताया गया कि बुधवार को ड्यूटी के दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर पठानकोट स्थित उनके घर लाया गया। जवान की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

साधारण परिवार से थे सतीश

सतीश कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। उनके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जबकि उनकी मां दिव्यांग हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई भी हैं। परिवार एक छोटे से कमरे में रहता है। सतीश ने मुश्किल हालात के बावजूद हार नहीं मानी। बिना किसी सिफारिश या आर्थिक मदद के उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर BSF में जगह बनाई। परिवार के मुताबिक, उन्होंने दौड़ और रेहड़ी पर काम करते हुए अपने सपने को पूरा किया था।

मकान बनाने की कही थी बात

परिवार ने बताया कि सतीश करीब एक महीने पहले पुलिस वेरिफिकेशन के सिलसिले में घर आए थे। उस समय उन्होंने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का सपना साझा किया था। सतीश ने कहा था कि अब अपनी कमाई से परिवार के लिए एक पक्का मकान बनवाएंगे। परिवार को क्या पता था कि यह मुलाकात आखिरी साबित होगी। सतीश के अचानक निधन से उनके परिजनों का यह सपना अधूरा रह गया। तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर जब घर पहुंचा तो परिवार और आसपास के लोगों की आंखें नम हो गईं।

Related to this topic: