For India, the question of the Su-57E

बड़े डिफेंस पैकेज के साथ आए हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन, भारत किस-किस पर करेगा हां?

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: September 11 2026 05:16:13 PM

बड़े डिफेंस पैकेज के साथ आए हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन, भारत किस-किस पर करेगा हां?भारत के लिए Su-57E का सवाल सिर्फ एक नया फाइटर जेट खरीदने का नहीं है

बड़े डिफेंस पैकेज के साथ आए हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत किस-किस पर करेगा हां

बड़े डिफेंस पैकेज के साथ आए हैं रूस के राष्ट्रपति पुतिन, भारत किस-किस पर करेगा हां?

भारत के लिए Su-57E का सवाल सिर्फ एक नया फाइटर जेट खरीदने का नहीं है

असली मुद्दा है टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्वदेशी क्षमता और AMCA के भविष्य का है.

भारत के सामने सवाल है Su-57E को AMCA तक पहुंचने का पुल बनाया जाए?

भारत के लिए AMCA आने तक ब्रिज क्षमता के तौर पर पेश कर रहा है Su-57E 

नई दिल्ली

आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात जब पीएम मोदी से होगी तो रूस के Su-57E पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट पर एक बार फिर बातचीत हो सकती है. भारत के लिए Su-57E का सवाल सिर्फ एक नया फाइटर जेट खरीदने का नहीं है. असली मुद्दा है टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्वदेशी क्षमता और AMCA के भविष्य का है. यानी भारत के सामने सवाल है Su-57E को AMCA तक पहुंचने का पुल बनाया जाए या पूरी ताकत स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम पर लगाई जाए? 

कई और बड़े रक्षा प्रस्ताव भी रख रहा

रूस भारत को Su-57E देने के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में इसके ज्वाइंट प्रोडक्शन का प्रस्ताव दे रहा है. सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में भारत को 2 Su-57E दिए जा सकते हैं. इसके बाद भारत में 3 से 5 स्क्वाड्रन के निर्माण किए जा सकते हैं. रूस Su-57 के इंजन से जुड़ी तकनीक और कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण भारत में करने की पेशकश भी कर रहा है.

AMCA आने तक ब्रिज बनेगा Su-57E

भारत के सामने लड़ाकू विमानों की कमी एक बड़ी चुनौती है. वहीं, स्वदेशी AMCA को ऑपरेशनल होने में अभी समय लगेगा. दूसरी तरफ चीन के पास J-20 पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान पहले से मौजूद है. ऐसे में रूस Su-57E को भारत के लिए AMCA आने तक एक अंतरिम या ब्रिज क्षमता के तौर पर पेश कर रहा है.

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर रूस की पुष्टि

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कहा है कि Su-57E को लेकर भारत और रूस के बीच बातचीत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मुद्दा शामिल है. हालांकि, भारत पहले रूस के साथ FGFA प्रोग्राम से बाहर हो चुका है. उस समय लागत, स्टेल्थ क्षमता, इंजन, प्रदर्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर भारत की चिंताएं थीं.

ये रहा रूस का बड़ा डिफेंस पैकेज

Su-57E के अलावा रूस भारत के सामने कई और बड़े रक्षा प्रस्ताव भी रख रहा है. 

* करीब 260 Su-30MKI के अपग्रेड का प्रस्ताव

* नए AESA रडार और एवियोनिक्स 

* इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और नए इंजन 

* Su-30MKI में R-37M लंबी दूरी की मिसाइल का इंटीग्रेशन 

* 5 अतिरिक्त S-400 सिस्टम और रडार 

* रणनीतिक पनडुब्बियों से जुड़े प्रस्ताव 

* BrahMos मिसाइल प्रोग्राम के अपग्रेड पर बातचीत

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