अनिश्चित नियमों और मनमानी शर्तों के कारण गिग वर्कर्स की आमदनी घटती जा रही है
अनिवार्य पैनिक बटन डिवाइस लगाने से ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है
पुराने डिवाइस हटा नए डिवाइस लगाने में ड्राइवरों को 12 हजार तक खर्च करने पड़ रहे
TGPWU ने की राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन की घोषणा
ऐप-आधारित ड्राइवरों के लिए न तो न्यून किराया तय है और न ही कोई स्पष्ट नीति लागू
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांगें रखी हैं
नई दिल्ली
देशभर में 7 फरवरी को ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों ने एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल के चलते ड्राइवर अपने मोबाइल ऐप बंद रखेंगे, जिससे ऑनलाइन कार, ऑटो और बाइक-टैक्सी सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी। यूनियन के मुताबिक, अनिश्चित नियमों और मनमानी शर्तों के कारण गिग वर्कर्स की आमदनी घटती जा रही है और उनका भविष्य असुरक्षित होता जा रहा है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। महाराष्ट्र कामगार सभा ने हड़ताल का समर्थन करते कहा कि अनिवार्य पैनिक बटन डिवाइस लगाने से ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। पुराने डिवाइस हटाकर नए डिवाइस लगाने में ड्राइवरों को 12 हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
ड्राइवरों का लगातार शोषण हो रहा है
तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है, जिसे ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। यूनियन का कहना है कि ऐप-आधारित ड्राइवरों के लिए न तो न्यूनतम किराया तय है और न ही कोई स्पष्ट नीति लागू की गई है। इसके चलते ड्राइवरों का लगातार शोषण हो रहा है।
नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग
यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर अपनी मांगें रखी हैं। पत्र में मांग की गई है कि सरकार ऐप-आधारित टैक्सी और ऑटो सेवाओं के लिए न्यूनतम किराया तय करे और एग्रीगेटर कंपनियों पर सख्त नियम लागू किए जाएं। ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनियां मनमाने तरीके से भारी कमीशन काट रही हैं, जिससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही
ड्राइवर संगठनों ने ओपन परमिट पॉलिसी के तहत ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या और अवैध बाइक-टैक्सी संचालन पर भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इन कारणों से पारंपरिक और ऐप-आधारित ड्राइवरों दोनों को भारी नुकसान हो रहा है। संगठनों के मुताबिक, इन नीतियों और अवैध संचालन के चलते लाखों गिग वर्कर्स आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं, जबकि एग्रीगेटर कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं।