पंजाब में बिजली संकट गहराया, रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट पहुंची मांग, जालंधर में 10-11 घंटे के कट से लोगों का फूटा गुस्सा
पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार को राज्य में बिजली की मांग रिकॉर्ड 16,619 मेगावाट तक पहुंच गई। वहीं, कई थर्मल और हाइडल यूनिट बंद होने के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर आम लोगों के साथ-साथ उद्योगों और कृषि क्षेत्र पर भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी के मुताबिक, निजी तलवंडी साबो थर्मल प्लांट के पास करीब 7 दिन का कोयला स्टॉक बचा है, जबकि राजपुरा थर्मल प्लांट में सिर्फ 3 दिन का कोयला भंडार मौजूद है। इसी बीच तकनीकी खराबी के चलते राजपुरा थर्मल प्लांट का 700 मेगावाट क्षमता वाला यूनिट नंबर-1 भी बंद हो गया। इस प्लांट का दूसरा 700 मेगावाट यूनिट पहले से ही बंद है।
थर्मल और हाइडल यूनिटों के बंद रहने से राज्य में करीब 1,915 मेगावाट बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। बिजली संकट के चलते उद्योगों में करीब साढ़े चार घंटे, जिला मुख्यालयों पर 3 से 4 घंटे और ग्रामीण इलाकों में करीब एक घंटे तक बिजली कटौती की गई। वहीं, कृषि क्षेत्र को भी केवल 5 से 6 घंटे बिजली मिल पा रही है।
जालंधर में 10-11 घंटे के बिजली कट से लोगों का प्रदर्शन
बिजली कटौती से परेशान जालंधर के इंडस्ट्रियल एरिया के लोगों का गुस्सा शुक्रवार रात सड़क पर देखने को मिला। लगातार 10 से 11 घंटे के बिजली कट से परेशान लोगों ने रात करीब 11:30 बजे सोडल चौक पर जाम लगा दिया और सरकार तथा PSPCL के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शाम करीब 7 बजे से अगले दिन सुबह 6 बजे तक लगातार बिजली बंद रखी जा रही है। बिजली नहीं होने के कारण पीने के पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि रातभर बिजली गुल रहने से गर्मी में सोना भी मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों, खासकर JE और XEN पर भी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि अधिकारी अक्सर पावर कट के लिए पटियाला मुख्यालय से आए आदेशों का हवाला देते हैं।
राजपुरा में सिर्फ तीन दिन का कोयला
रिपोर्ट के अनुसार, थर्मल प्लांटों में करीब 20 दिन का कोयला स्टॉक बनाए रखना जरूरी माना जाता है। लेकिन राजपुरा प्लांट में फिलहाल करीब 18 प्रतिशत स्टॉक बचा है, जो लगभग 3 दिन के लिए पर्याप्त है। तलवंडी साबो प्लांट में करीब 23 प्रतिशत स्टॉक है, जो लगभग 7 दिन चल सकता है।
इसके मुकाबले सरकारी लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट में करीब 68 प्रतिशत कोयला स्टॉक मौजूद है, जो लगभग 12 दिन की जरूरत पूरी कर सकता है। वहीं, रोपड़ थर्मल प्लांट में कोयले का स्टॉक 169 प्रतिशत बताया गया है, जो करीब 66 दिन की खपत के लिए पर्याप्त है।
पावरकॉम को बाहर से लेनी पड़ी 11,747 मेगावाट बिजली
शुक्रवार को पावरकॉम अपने स्रोतों से केवल 4,162 मेगावाट बिजली पैदा कर सका, जबकि मांग पूरी करने के लिए उत्तरी ग्रिड से करीब 11,747 मेगावाट बिजली लेनी पड़ी।
रोपड़ थर्मल प्लांट का 210 मेगावाट यूनिट और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट का 660 मेगावाट यूनिट भी बंद बताया गया है। इसके अलावा रणजीत सागर डैम के 300-300 मेगावाट क्षमता वाले दो हाइडल यूनिट और UBDC के तीन यूनिट भी बंद हैं।
सरकार से 24 घंटे बिजली देने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार से मुफ्त बिजली और बिल माफी के दावों के बजाय 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिजली संकट का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और सड़कों पर पक्का धरना लगाया जाएगा।
बिजली मंत्री ने पांच दिन पहले दी थी चेतावनी
गौरतलब है कि करीब पांच दिन पहले पंजाब के बिजली मंत्री तरनप्रीत सिंह सौंद ने भी कोयले की कमी के कारण पैदा हुए बिजली संकट को लेकर वीडियो जारी किया था। उन्होंने कहा था कि देशभर में कोयले की कमी के चलते कई निजी बिजली संयंत्रों में केवल कुछ दिनों का स्टॉक बचा है।
मंत्री के मुताबिक, राजपुरा स्थित नाभा पावर लिमिटेड और मानसा स्थित तलवंडी साबो पावर प्लांट केंद्रीय आपूर्ति वाले कोयले पर निर्भर हैं। पर्याप्त कोयला नहीं मिलने के कारण इन दोनों बड़े प्लांटों को अपनी पूरी क्षमता के बजाय करीब आधी क्षमता पर चलाना पड़ रहा है।
ऐसे में पंजाब में बढ़ती बिजली मांग, कम होते कोयला भंडार और बंद पड़े बिजली यूनिटों ने सरकार और पावरकॉम के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
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