CEC ज्ञानेश कुमार को CJP का अल्टीमेटम, इस्तीफा नहीं तो देशभर में आंदोलन शुरु करने की चेतावनी
दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप
बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें देश का “सबसे बड़ा गद्दार” बताया गया
यह आरोप स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए
वहीं पार्टी SIR व मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध जारी रखेगी
गत 10 माह में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर 14 बार आपत्ति दर्ज
नई दिल्ली
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय में इस्तीफा नहीं दिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसके बाद दिल्ली में प्रदर्शन किया जाएगा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए।
CJP ने देश का “सबसे बड़ा गद्दार” बताया
अभिजीत दीपके ने कहा कि SIR (Special Intensive Revision) के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए गए हैं और इससे लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ रहा है। दीपके ने ज्ञानेश कुमार को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें देश का “सबसे बड़ा गद्दार” बताया। हालांकि, ये आरोप CJP फाउंडर की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
‘जनता तय करे कि सरकार कौन बनाए’
दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सरकार चुनने का अधिकार है। उनका आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद ऐसी स्थिति बन रही है, जिसमें यह तय किया जा रहा है कि कौन वोट कर सकेगा और कौन नहीं। पार्टी SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगी। CJP ने इसी क्रम में पहले 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है और उसके बाद देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
SIR को लेकर EC के अंदर उठे सवाल
विवाद ऐसे समय आया है जब The Indian Express की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।