Said—injuries are part of the game

खिलाड़ी मशीन नहीं, फिट होने में समय लगता है : वीवीएस लक्ष्मण

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: August 10 2026 05:43:26 PM

खिलाड़ी मशीन नहीं, फिट होने में समय लगता है : वीवीएस लक्ष्मणकहा- इंजरी खेल का हिस्सा, किसी को भी दोषी नहीं ठहरा सकते

खिलाड़ी मशीन नहीं फिट होने में समय लगता है  वीवीएस लक्ष्मण

खिलाड़ी मशीन नहीं, फिट होने में समय लगता है : वीवीएस लक्ष्मण

कहा- इंजरी खेल का हिस्सा, किसी को भी दोषी नहीं ठहरा सकते

 CoE और पुरुष-महिला टीमों की मैनेजमेंट में शानदार तालमेल है

खिलाड़ी के फिट होने तक मॉनिटरिंग, तभी वर्कलोड बढ़ाया जाता है

प्लेयर्स को बेहतर बनाने में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की बड़ी भूमिका

पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने खिलाड़ियों के धीरे फिट होने में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) को दोषी मानने से इनकार किया है। कहा कि क्रिकेटर मशीन नहीं है। ऐसा नहीं है कि हर बार वे जल्दी चोट से उबर जाएंगे। लक्ष्मण BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि CoE और पुरुष-महिला दोनों टीमों के मैनेजमेंट के बीच शानदार तालमेल है। लक्ष्मण का बयान ऐसे टाइम पर आया है, जब देशभर में खिलाड़ियों के चोटिल होने पर सवाल उठ रहे हैं। लक्ष्मण ने अपनी बात समझाने के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन का उदाहरण दिया। 

लक्ष्मण ने कहा- CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं

लक्ष्मण ने कहा- ‘CoE सिर्फ रिहैब सेंटर नहीं है। क्रिकेटर्स को बेहतर बनाने में इसकी बड़ी भूमिका है। इसलिए चोट के लिए दोष शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहते, क्योंकि इससे किसी को बलि का बकरा बनाया जाता है।’ लक्ष्मण ने कहा कि फिटनेस के नियम कड़े हैं। साथ ही सभी खिलाड़ियों के शरीर का नेचर भी अलग है। इस वजह से कोई खिलाड़ी तय समयसीमा में पूरी तरह फिट नहीं हो पाता। खिलाड़ी के फिट होकर जाने तक मॉनिटरिंग होती है। तभी उसका वर्कलोड बढ़ाया जाता है।

इंजरी से फिट होने तक का प्रोसेस समझाया

खिलाड़ी के इंजरी से फिट होने तक का प्रोसेस समझाया। लक्ष्मण ने कहा कि सिलेक्टर्स CoE से खिलाड़ी की फिटनेस की रिपोर्ट मांगता है। CoE यह रिपोर्ट सिलेक्शन कमिटी के प्रेसिडेंट को भेजता है। इसकी कॉपी दोनों टीमों के हेड कोच और BCCI को दी जाती है। ‘बुमराह और सुदर्शन के नाम के आगे हमेशा एक स्टार चिन्ह लगा होता है। इसका मतलब है- फिट रहने पर खेलेंगे। अगर खिलाड़ी की प्रोग्रेस धीमी होती है, तो सिलेक्शन कमिटी प्रेसिडेंट और हेड कोच को इन्फोर्मेशन दी जाती है।

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