दिलरोज हत्याकांड में नीलम की फांसी का फैसला उम्रकैद में तब्दील, सेशन कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती
लुधियाना के बहुचर्चित इस हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है
दिलरोज को जिंदा दफन करने के मामले ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया था
सेशन कोर्ट ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला मानकर फांसी की सजा सुनाई थी
हाईकोर्ट का आदेश-नीलम को कम से कम 30 वर्ष तक जेल में रहना होगा
लुधियाना
लुधियाना के बहुचर्चित दिलरोज हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी नीलम (38) को सेशन कोर्ट द्वारा दी फांसी को उम्रकैद में बदल दिया है। वर्ष 2021 में ढाई साल की मासूम दिलरोज कौर को जिंदा दफन करने के मामले ने पूरे पंजाब को झकझोर दिया था। सेशन कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला मानते हुए नीलम को फांसी सुनाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने अब सजा में संशोधन करते हुए आदेश दिया है कि नीलम को कम से कम 30 वर्ष तक जेल में रहना होगा और इस दौरान उसे किसी प्रकार की कानूनी राहत नहीं मिलेगी।
बच्चों के खिलौनों और तोहफों को लेकर हुई थी रंजिश
शिमलापुरी निवासी पंजाब पुलिस के हेड कांस्टेबल हरप्रीत सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे। पड़ोस में रहने वाली नीलम के बच्चों और दिलरोज के बीच अक्सर तुलना होती थी। बताया गया कि हरप्रीत अपनी बेटी के लिए खिलौने, कपड़े और अन्य सामान लाते थे, जबकि आर्थिक तंगी के कारण नीलम अपने बच्चों की सभी मांगें पूरी नहीं कर पाती थी। इसी बात को लेकर उसके मन में पड़ोसी परिवार के प्रति रंजिश पैदा हो गई थी।
बच्ची को एक्टिवा पर बैठाकर सुनसान प्लॉट में ले गई
28 नवंबर 2021 को दिलरोज घर के बाहर खेल रही थी। आरोप है कि नीलम उसे एक्टिवा पर बैठाकर एल्डिको के पास एक सुनसान प्लॉट में ले गई। जांच में सामने आया कि वहां पहले से गड्ढा खोदा गया था। नीलम ने बच्ची के मुंह में मिट्टी भरकर उसे गड्ढे में डाल दिया और ऊपर से मिट्टी डाल दी। बाद में पुलिस ने उसकी निशानदेही पर बच्ची को बाहर निकाला, लेकिन अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
बच्ची की तलाश का किया नाटक, CCTV से खुला राज
वारदात के बाद नीलम ने परिवार के साथ बच्ची की तलाश का नाटक भी किया। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें वह दिलरोज को एक्टिवा पर ले जाती दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां अपराध कबूल कर लिया। मामले में हत्या, अपहरण और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद नीलम को कम से कम 30 साल जेल में बिताने होंगे।