नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत–रूस वार्षिक बैठक
राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत से यात्रा की शुरुआत
पुतिन ने राजघाट में जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी
रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और शिक्षा जैसे अहम क्षेत्रों पर की चर्चा
नई दिल्ली :
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 23वीं भारत–रूस वार्षिक बैठक हुई। पुतिन चार साल बाद भारत की दो दिन की राजकीय यात्रा पर पहुंचे हैं। उनकी यात्रा की शुरुआत राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत से हुई, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री मोदी ने उनका स्वागत किया। तीनों सेनाओं ने पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद पुतिन ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और शिक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा की।
पीएम मोदी ने कहा- 'भारत न्यूट्रल नहीं हैं'
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन का तारीफ करते हुए कहा, "आपकी यह यात्रा बहुत ऐतिहासिक है। 2001 में जब आपने कार्यभार संभाला था और पहली बार भारत आए थे, उस यात्रा को 25 साल हो गए हैं. उसी पहली यात्रा में हमारी रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव रखी गई थी." पीएम मोदी ने कहा, "मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से भी यह खुशी की बात है. पीएम ने कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि भारत न्यूट्रल नहीं है. भारत का पक्ष है और वो पक्ष शांति का है. हम शांति के हर प्रयासों का समर्थन करते हैं. शांति के हर प्रयास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।"
बिना रुकावट ईंधन सप्लाई देता रहेगा रूस
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि भारत–रूस संबंध कई क्षेत्रों में और मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों का आपसी व्यापार अब रुपये और रूबल में हो रहा है। पुतिन ने कहा कि रूस, भारत को बिना रुकावट ईंधन सप्लाई देता रहेगा और वह ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम में भी सहयोग करेगा। बातचीत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के पुराने और मजबूत रिश्तों को और आगे बढ़ाना था। बैठक में कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें हेल्थकेयर, मेडिकल शिक्षा, फूड सेफ्टी, फर्टिलाइज़र सप्लाई, माइग्रेशन और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
आने वाले समय में भारत–रूस साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रूस में भारत के दो नए कॉन्सुलेट खोले गए हैं, जिससे दोनों देशों के नागरिकों को बहुत लाभ होगा। उन्होंने कहा कि भारत और रूस मिलकर कौशल प्रशिक्षण, छात्र विनिमय और युवा कार्यक्रमों पर काम बढ़ाएंगे। यूक्रेन संकट पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत न्यूट्रल नहीं है। भारत का पक्ष शांति है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया जल्द ही शांति की राह पर लौटेगी। रूस द्वारा भारत के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र में दिए जा रहे सहयोग को पुतिन ने “फ्लैगशिप प्रोजेक्ट” बताया। बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में भारत–रूस साझेदारी और गहरी होगी।