To get rid of floods

बाढ़ से निजात पाने के लिए कुदरत के करीब जाकर दरिया के लिए बाढ़ क्षेत्र छोड़ना जरूरी : संत सीचेवाल

Written by:

Nischal Nayyar

Last Updated: September 09 2025 02:00:26 PM

बाढ़ से निजात पाने के लिए कुदरत के करीब जाकर दरिया के लिए बाढ़ क्षेत्र छोड़ना जरूरी : संत सीचेवाल

बाढ़ से निजात पाने के लिए कुदरत के करीब जाकर दरिया के लिए बाढ़ क्षेत्र छोड़ना जरूरी  संत सीचेवाल

हमें वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखना है

आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें तैयार रहना होगा

कुदरत से छेड़छाड़ करनी शुरू की है, तबसे मुश्किलों में घिरता जा रहा

बांधों में इस बार आई बाढ़ ने पानी के पिछले सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़े

बांधों को मज़बूत करने के लिए पक्की सड़कों का निर्माण होना चाहिए

नई दिल्ली/चंडीगढ़ : 

राज्यसभा सदस्य और पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने कहा कि बाढ़ों से निजात पाने के लिए हमें कुदरत के करीब जाना होगा और दरिया के लिए बाढ़ क्षेत्र छोड़ना होगा। पिछले 29 दिनों से बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर पीड़ितों का सहारा बने संत सीचेवाल ने कहा कि हमें वैश्विक स्तर पर हो रहे जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलें तय करनी होंगी।

विकास मॉडल को प्रस्तुत किया

जलवायु परिवर्तन से आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें तैयार रहना होगा। जिस विकास मॉडल को प्रस्तुत किया जा रहा है, उसने तबाही मचाई है। इस विकास मॉडल ने जंगलों और पहाड़ों का विनाश किया है। संत सीचेवाल ने कहा कि दरिया के किनारे सभ्यताएँ बसने का बड़ा कारण यह था कि दरिया अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लाती थीं। यही मिट्टी खेती के लिए लाभदायक होती थी, पर जब से इंसान ने कुदरत से छेड़छाड़ करनी शुरू की है, तब से मुश्किलों में घिरता जा रहा है।

कुल 900 किमी लंबा धुसी बांध

गौरतलब है कि पंजाब में सतलुज, ब्यास, रावी और घग्गर के इर्द-गिर्द कुल 900 किलोमीटर लंबे धुसी बांध हैं। इनमें से 226 किलोमीटर सतलुज, 164 किलोमीटर रावी, 104 किलोमीटर ब्यास और लगभग 100 किलोमीटर घग्गर के किनारे हैं। इसके अलावा छोटी नदियों और चोओं (नालों) के आसपास भी 300 किलोमीटर लंबे कच्चे बांध बने हुए हैं। ये बांध 1950-60 के दशक में बनाए गए थे और इस बार आई बाढ़ ने पानी के पिछले सारे पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए।

खेतों या ट्यूबवेल पर 5 पेड़ लगाएँ

संत सीचेवाल ने कहा कि धुसी बांधों को मज़बूत करने के लिए इनके ऊपर पक्की सड़कों का निर्माण होना चाहिए और बांधों पर पेड़ लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ से बचाव का सबसे आसान तरीका है कि हम अपने खेतों या ट्यूबवेल पर कम से कम पाँच पेड़ लगाएँ। पंजाब में 14 लाख ट्यूबवेल हैं और अगर हर ट्यूबवेल पर पाँच पेड़ भी लग जाएँ तो 70 लाख पेड़ों की बढ़ोतरी होगी। ये पेड़ बाढ़ को कम करने में सहायक होंगे और समय पर वर्षा कराने में भी मददगार साबित होंगे।

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