इलाज के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ
उन्होंने 1976 में SUPPORT फाउंडेशन की स्थापना की थी
पर्यावरण क्षेत्र में अहम योगदान के कारण बनीं ‘ग्रीन क्वीन’
ग्रामीण गरीबों की मदद के लिए कई परियोजनाएं कीं शुरू
इंटरनेशनल डेस्क
थाईलैंड की राजमाता सिरिकिट का बैंकॉक के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 93 वर्ष की थीं। रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो ने उनके निधन की पुष्टि की। राजमाता पिछले कुछ सालों से बीमार थीं और सार्वजनिक जीवन से दूर थीं। हाल ही में उनके 88वें जन्मदिन (12 अगस्त) पर उनके बेटे वर्तमान राजा महा वजिरालोंगकोर्न और अन्य शाही सदस्य उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। राजमाता सिरिकिट 17 अक्टूबर से ब्लड इंफेक्शन की समस्या से जूझ रही थीं। इलाज के बावजूद उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
‘ग्रीन क्वीन’ और मदर ऑफ द नेशन
उन्होंने 1976 में SUPPORT फाउंडेशन की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों को पारंपरिक कलाओं में प्रशिक्षण देना था। पर्यावरण के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें ‘ग्रीन क्वीन’ के नाम से भी जाना जाता था। मदर ऑफ द नेशन राजमाता सिरिकिट को उनके जनकल्याण और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए जाना जाता था। उन्होंने ग्रामीण गरीबों की मदद करने, पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे रेशम बुनाई, गहना निर्माण, पेंटिंग और मिट्टी के बर्तनों को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं शुरू की थीं।
प्रेम कहानी : पेरिस से स्विट्जरलैंड तक
सिरिकिट कितियाकारा का जन्म 12 अगस्त 1932 को बैंकॉक के एक कुलीन परिवार में हुआ था, जिसके माता-पिता का संबंध थाईलैंड के चक्री वंश से था। सेकिंड वर्ल्ड वॉर के बाद वे अपने पिता के साथ फ्रांस चली गईं, जहां उनके पिता राजदूत थे। वहीं 16 साल की उम्र में उनकी मुलाकात राजा भूमिबोल से हुई। राजा भूमिबोल के एक सड़क हादसे में घायल होने पर सिरिकिट उनकी देखभाल के लिए स्विट्जरलैंड चली गईं। वहीं दोनों के बीच प्रेम पनपा और उन्होंने 1950 में विवाह कर लिया। उनके पति, थाईलैंड के पूर्व राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का निधन अक्टूबर 2016 में हुआ था।