The train will cover a distance of 89 kilometers

Green हाइड्रोजन से चलती है ‘नमो ग्रीन रेल’, हरियाणा के जींद स्टेशन से PM मोदी ने दिखाई झंडी

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: July 17 2026 04:10:02 PM

Green हाइड्रोजन से चलती है ‘नमो ग्रीन रेल’, हरियाणा के जींद स्टेशन से PM मोदी ने दिखाई झंडीजींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी ट्रेन

green हाइड्रोजन से चलती है ‘नमो ग्रीन रेल’ हरियाणा के जींद स्टेशन से pm मोदी ने दिखाई झंडी

Green हाइड्रोजन से चलती है ‘नमो ग्रीन रेल’, हरियाणा के जींद स्टेशन से PM मोदी ने दिखाई झंडी

जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी ट्रेन 

वहीं, यह देश की पहली ऐसी ट्रेन है जो हाइड्रोजन फ्यूल से चलेगी

हाइड्रोजन इंजन पानी की भाप निकालता और प्रदूषण नहीं फैलता

दूसरी ओर, भारत के नेशनल हाइड्रोजन मिशन का हिस्सा है ये ट्रेन

जींद (हरियाणा) : 

देश में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हो गई है. पीएम मोदी ने हरियाणा के जींद स्टेशन से इसे हरी झंडी दिखाई. ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर का सफर तय करेगी. यह देश की पहली ऐसी ट्रेन है जो हाइड्रोजन फ्यूल से चलेगी. इसके जरिए बिजली पैदा की जाती है और ट्रेन इससे संचालित होती है. सबसे बड़ा फर्क है कि डीजल इंजन धुआं छोड़ते हैं और प्रदूषण फैलता है, लेकिन हाइड्रोजन इंजन पानी की भाप निकालता है और इससे प्रदूषण नहीं फैलता. इसे पानी का इलेक्ट्रोलिसिस करके बनाया जाता है. बिजली, सौर या पवन ऊर्जा से मिलती है. इसका कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य है. यही वजह है कि इसे सबसे सेफ माना जाता है

पानी और सस्ती बिजली

यह ट्रेन भारत के नेशनल हाइड्रोजन मिशन का हिस्सा है, जिसकी घोषणा मोदी सरकार ने फरवरी 2022 में की थी. सरकार ने 2030 तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन का लक्ष्य रखा है. ग्रीन हाइड्रोजन बनाने के लिए पानी और सस्ती बिजली की जरूरत होती है. भारत के पास ये दोनों संसाधन मौजूद हैं. सोलर एनर्जी और समुद्र का पानी ग्रीन हाइड्रोजन बनाने में मददगार साबित हो सकता है. 

क्या है हाइड्रोजन फ्यूल?

हाइड्रोजन ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व है. यह हमेशा पानी (H₂O) या हाइड्रोकार्बन जैसे यौगिकों में बंधा होता है. जब इसे अलग करके ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो इसे हाइड्रोजन फ्यूल कहा जाता है. खास बात यह है कि जब हाइड्रोजन जलता है या फ्यूल सेल में इस्तेमाल होता है, तो इससे कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बल्कि सिर्फ पानी की भाप निकलती है. यही वजह है कि इसे क्लीन फ्यूल कहा जाता है.

ग्रीन हाइड्रोजन इस्तेमाल

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल किया गया है. यह ट्रेन भारत के नेशनल हाइड्रोजन मिशन का हिस्सा है. 2023 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में बताया था कि भारतीय रेलवे “हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज” योजना के जरिए 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को चलाएगा. एक ट्रेन के निर्माण में 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे. जमीनी सुविधाएं विकसित करने में 70 करोड़ रुपए का खर्च आएगा.

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