Drug dealer arrested:

दवा व्यापारी गिरफ्तार: जालंधर में साइकोट्रॉपिक ड्रग्स की ब्लैक मार्केटिंग और 3.75 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

Written by:

Nischal Nayyar

Last Updated: December 11 2025 04:37:44 PM

जालंधर इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ईडी) की बड़ी कार्रवाई—मेडिकल व्यापारी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार

दवा व्यापारी गिरफ्तार जालंधर में साइकोट्रॉपिक ड्रग्स की ब्लैक मार्केटिंग और 375 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

जालंधर ज़ोन की ईडी टीम ने एक मेडिकल व्यापारी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है।

व्यापारी पर आरोप है कि उसने ट्रामाडोल और एल्प्राजोलम जैसी साइकोट्रॉपिक दवाओं को बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बेचकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की।

जालंधर डेस्क :- 

मेडिकल व्यापारी अभिषेक कुमार को ईडी ने मंगलवार को मोहाली स्थित स्पेशल कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने उसे छह दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया। एजेंसी का कहना है कि अब तक जांच में लगभग 3.75 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है।

फार्मा कंपनियों से दवाएं मंगवाकर ब्लैक मार्केट में बेचता था माल

ईडी ने यह जांच पंजाब पुलिस द्वारा NDPS एक्ट के तहत दर्ज एक मामले के आधार पर शुरू की थी। इस केस में इंटर-स्टेट स्तर पर ट्रामाडोल और एल्प्राजोलम जैसी साइकोट्रॉपिक दवाओं की तस्करी के आरोप शामिल थे। जांच के दौरान ईडी ने अभिषेक और उससे जुड़े लोगों के 16 ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से कई अहम दस्तावेज और रिकार्ड जब्त किए गए।
इन दस्तावेजों से खुलासा हुआ कि नशे के रूप में भी इस्तेमाल होने वाली इन गोलियों को फार्मा कंपनियों से मंगवाकर ब्लैक मार्केट में बेचा जा रहा था।

ड्रग पैडलरों के जरिए कई गुना दाम में होती थी बिक्री

जांच में पता चला कि कई होलसेलर और रिटेलर—जिनमें बायोजेनेटिक ड्रग्स प्रा. लि., सीबी हेल्थ केयर, समीलेक फार्माचेम, अस्तर फार्मा सॉल हेल्थ केयर प्रा. लि. आदि शामिल हैं—से बड़ी मात्रा में साइकोट्रॉपिक टैबलेट्स खरीदी जाती थीं। इसके बाद यह दवाएं ड्रग पैडलरों के जरिए बाज़ार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर ब्लैक मार्केट में बेची जाती थीं।

75% स्टॉक बिना हिसाब के बेचने का आरोप

ईडी के अनुसार अभिषेक कुमार ने अपनी फर्म श्री श्याम मेडिकल एजेंसी के नाम पर दवाओं की भारी खरीद की। लेकिन इस स्टॉक का लगभग 75% हिस्सा बिना किसी रिकॉर्ड के अवैध तरीके से बेच दिया गया। गैरकानूनी बिक्री को छुपाने के लिए बिलों में बॉक्सों की संख्या बढ़ाकर दिखाई जाती थी, ताकि ब्लैक में बेचे गए बॉक्स भी कागज़ों पर वैध बिक्री की तरह दर्ज हो सकें।
इन अवैध लेन-देन की नकद वैल्यू लगभग 3.75 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।

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