Khan Sahab gets angry at the Bapu Lal Badshah

बापू लाल बादशाह मेले में भड़के खान साहब, कहा- डंडों से ही मानोगे

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: July 20 2026 04:54:31 PM

बापू लाल बादशाह मेले में भड़के खान साहब, कहा- डंडों से ही मानोगेयुवाओं द्वारा हुड़दंगबाजी करने पर भड़क गए पंजाबी सिंगर

बापू लाल बादशाह मेले में भड़के खान साहब कहा- डंडों से ही मानोगे

बापू लाल बादशाह मेले में भड़के खान साहब, कहा- डंडों से ही मानोगे

युवाओं द्वारा हुड़दंगबाजी करने पर भड़क गए पंजाबी सिंगर 

कहा जब पुलिस माथे पर डंडे बरसाएंगी क्या तब मजा आएगा

गर्मी काफी ज्यादा है और आप मेले में बैठकर आराम से सुनो

समय की अहमियत को समझें और चुपचाप नीचे बैठ जाएं

जालंधर : 

नकोदर में आयोजित बापू लाल बादशाह के मेले में पंजाबी सिंगर खान साहब पहुंचे। जहां वह युवाओं द्वारा हुड़दंगबाजी करने पर भड़क गए। इस दौरान उन्होंने मेले में आए युवाओं से बैठने की अपील की। लेकिन उसके बावजूद कुछ युवा लगातार हुड़दंगबाजी करते रहे। जिसके बाद खान साहब ने कहा कि लोगों से बैठने की अपील की, लेकिन फिर भी ना बैठने पर वह भड़क गए और कहा कि जब पुलिस आपके माथे पर डंडे बरसाएंगी क्या तब मजा आएगा। 

मेले में बैठकर आराम से सुनो आप

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि गर्मी काफी ज्यादा है और आप मेले में बैठकर आराम से सुनो। आपके द्वारा लगातार की जा रही हूटिंग से किसी को हार्ट अटैक हो जाएगा, जोकि वह नहीं चाहते। खान साहब ने कहा कि साल में एक बार प्रोग्राम में आने का मौका मिलता है, उसे भी खड़े होकर आप खराब कर रहे हो। मैं मानता हूं आप सब मुझसे बहुत प्यार करते हो, लेकिन शांति बनाकर रखें। इसके बाद मैनेजमेंट ने भी अपील की, लेकिन युवक बैठे नहीं। 

समय की अहमियत को भी समझें 

इस बीच मैनेजमेंट ने कह दिया कि अगर नहीं बैठोगे तो खान साहब का प्रोग्राम यहीं रोक दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आप लोगों के ना बैठने की वजह से मेरा कीमती समय कम हो रहा है। समझ नहीं आता कि आप लोग शांत होकर अपनी जगह पर बैठ क्यों नहीं जाते? यहां साल में बड़ी मुश्किल से एक बार आने का मौका मिलता है, इसलिए समय की अहमियत को समझें और चुपचाप नीचे बैठ जाएं।

आपका यह प्यार सिर आंखों पर है

उन्होंने कहा कि मैं अच्छी तरह जानता हूं कि आप लोग मुझसे बहुत प्यार करते हैं और बहुत दूर-दूर से मुझे यहां देखने आए हैं। आपका यह प्यार सिर आंखों पर है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम उत्साह में आकर एक-दूसरे की जान ही जोखिम में डाल दें। खुद को संभालिए और अनुशासन बनाए रखिए। युवकों के बैठने के बाद ही खान साहब ने धुरंधर फिल्म के गीत सुनाए।

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