निगम की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल, संत नगर में दो बार सील, दो बार डिच मशीन…फिर भी जारी अवैध निर्माण!
पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है
अवैध बिल्डिंग दोबारा सील कर तत्काल बंद कराने की मांग उठाई
निगम आयुक्त व डीसी कार्यालय के खिलाफ कई बार दी शिकायत
कुछ समय बाद निर्माण फिर शुरू व सील बिल्डिंग दोबारा खुल गई
जालंधर :
लाडोवाली रोड स्थित संत नगर में एक अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस बिल्डिंग को नगर निगम ने कई बार सील किया और दो बार डिच मशीन चलाकर अवैध हिस्से को गिराया, उसी भवन में दोबारा निर्माण कार्य शुरू हो गया है। इतना ही नहीं, सील की गई बिल्डिंग फिर से खुल गई, जिससे निगम की कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इलाका निवासियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सील तोड़ने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा अवैध बिल्डिंग को दोबारा सील कर निर्माण कार्य तत्काल बंद कराने की मांग उठाई है।
नगर निगम ने बिल्डिंग को सील किया
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इस अवैध निर्माण की शिकायत नगर निगम आयुक्त, डीसी कार्यालय और अन्य संबंधित अधिकारियों को कई बार दी गई थी। शिकायतों के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए बिल्डिंग को सील किया और दो बार अवैध हिस्से को ध्वस्त भी किया। लेकिन कुछ समय बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू हो गया और सील लगी बिल्डिंग दोबारा खुल गई।
सवालों का जवाब अब तक नहीं मिला
लोगों का कहना है कि यदि नगर निगम ने सील नहीं खोली, जैसा कि अधिकारी दावा कर रहे हैं, तो फिर यह सील आखिर किसने हटाई? यदि किसी ने अवैध रूप से सील तोड़ी है, तो उसके खिलाफ अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई? वहीं यदि प्रशासन की अनुमति से सील हटाई गई है, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की है? इन सवालों का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है।
कानून सभी के लिए समान होना चाहिए
स्थानीय लोगों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि नगर निगम की सीलिंग जैसी कार्रवाई भी बार-बार बेअसर साबित होती रही और अवैध निर्माण पर रोक नहीं लगी, तो लोगों का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें नगर निगम के खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।