फिटनेस टेस्ट में बड़ा बदलाव! 10 मिनट में 2KM दौड़ना होगा, 1200 मीटर के लिए सिर्फ 5:20 मिनट
टीम इंडिया का नया रूल, फिटनेस लेवल सुधारने की पहल
इनमें एक ब्रोंको टेस्ट और दूसरा 2 किलोमीटर की दौड़ है
दोनों टेस्ट बैक टु बैक होंगे, लिहाजा पहले से ज्यादा चैलेंजिंग
विशेषज्ञों का मानना-ओवर-ट्रेनिंग से बर्नआउट का खतरा
भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना अब पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर टीम के खराब प्रदर्शन के बाद BCCI ने फिटनेस पैरामीटर्स को ज्यादा चैलेंजिंग बनाने का फैसला किया है। भारतीय खिलाड़ियों को अपनी फिटनेस साबित करने के लिए दो तरह के टेस्ट से गुजरना होता है। इनमें एक ब्रोंको टेस्ट और दूसरा 2 किलोमीटर की दौड़ है। ब्रोंको टेस्ट के लिए पहले 6 मिनट का समय मिलता था। अब इसे 5 मिनट 15 सेकेंड से लेकर 5 मिनट 20 सेकेंड में पूरा करना होगा। इसके ठीक बाद 2 किलोमीटर की दौड़ 9 से 10 मिनट में पूरी करनी होगी।
अब फिटनेस टेस्ट पास करना कठिन क्यों
ब्रोंको टेस्ट में पांच सेट होते हैं। हर सेट में खिलाड़ियों को 20 मीटर अप-डाउन, 40 मीटर अप-डाउन और 60 मीटर अप-डाउन की दौड़ लगानी होती है। यानी एक सेट में कुल 240 मीटर दौड़ना होता है। पूरे टेस्ट में इस तरह के पांच सेट लगाने होते हैं। सेट के बीच कोई ब्रेक नहीं होता। पहले पूरे टेस्ट के लिए 6 मिनट का समय था। अब इसमें 40 सेकेंड तक की कमी की गई है।
खिलाड़ियों के लिए पहले से ज्यादा चैलेंजिंग
ब्रोंको टेस्ट के अलावा खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की रनिंग भी करनी होती है। पहले यह स्टैंड अलोन टेस्ट था। यानी इसे ब्रोंको के साथ नहीं लिया जाता था। अब 2 किलोमीटर की रनिंग ब्रोंको टेस्ट के ठीक बाद करनी होगी। समय में कुछ रियायत दी गई है। खिलाड़ी 2 किलोमीटर की दौड़ 9 से 10 मिनट में पूरी कर सकते हैं। दोनों टेस्ट बैक टु बैक होंगे, लिहाजा खिलाड़ियों के लिए यह पहले से ज्यादा चैलेंजिंग है।
बार-बार इंजरी पर फिजियो से जवाब-तलब
खिलाड़ियों के लगातार चोटिल होने और क्रैम्प्स की शिकायतों के बाद BCCI सेक्रेटरी देवजीत सैकिया और टीम मैनेजमेंट ने टीम के फिजियो कमलेश जैन से जवाब-तलब किया है। उन्हें साफ कहा गया है कि किसी भी खिलाड़ी के कद या स्टार स्टेटस की परवाह किए बिना फिटनेस में कमी दिखे तो उसकी तुरंत जानकारी दें। कई खिलाड़ियों की मैदान पर मोबिलिटी घटी है और लंबे समय तक बल्लेबाजी के दौरान सीनियर बल्लेबाजों को दौड़कर रन लेने में परेशानी हो रही है।
ओवर-ट्रेनिंग से बढ़ रहा बर्नआउट का खतरा
2023 वनडे वर्ल्ड कप, 2024 टी20 वर्ल्ड कप और 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारत का इंजरी मैनेजमेंट काफी प्रभावी रहा था। अब CoE में खिलाड़ियों से बार-बार यो-यो, ब्रोंको और 2K टेस्ट कराए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंजरी प्रिवेंशन पर फोकस करने के बजाय जरूरत से ज्यादा वर्कलोड देने से खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से थक सकते हैं, जिससे चोट का खतरा भी बढ़ सकता है।