Appeal to promote Indian handloom and handicrafts

हैंडलूम डे पर PM मोदी की युवाओं से अपील, बोले- स्वदेशी को बढ़ावा दें और GRWM वीडियो बनाएं

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: August 07 2026 01:02:11 PM

हैंडलूम डे पर PM मोदी की युवाओं से अपील, बोले- स्वदेशी को बढ़ावा दें और GRWM वीडियो बनाएंभारतीय हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने की अपील

हैंडलूम डे पर pm मोदी की युवाओं से अपील बोले- स्वदेशी को बढ़ावा दें और grwm वीडियो बनाएं

हैंडलूम डे पर PM मोदी की युवाओं से अपील, बोले- स्वदेशी को बढ़ावा दें और GRWM वीडियो बनाएं

भारतीय हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने की अपील

वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा

बुनकर परिवारों के हुनर को दुनिया तक पहुंचाने में मदद

रेशम और कपास के धागों से खूबसूरत डिजाइन तैयार

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर देश के युवाओं से 7 अगस्त को हैंडलूम डे मनाने और भारतीय हैंडलूम व हैंडीक्राफ्ट को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने युवाओं से हैंडलूम कपड़े पहनकर GRWM यानी ‘गेट रेडी विद मी’ वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा। पीएम मोदी ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को देश में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में देशवासी जुड़े और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।हैंडलूम डे मनाने का मतलब देश के उन बुनकर परिवारों को प्रोत्साहित करना है, जो अपने हाथों से कपड़े तैयार करते हैं और घरों में लूम पर काम करते हैं।

पीएम की हैंडलूम खरीदने की अपील

पीएम मोदी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे हैंडलूम से कोई न कोई सामान खरीदें और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करें। इससे देश के बुनकर परिवारों के हुनर को दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा मिलेगा।

GRWM वीडियो युवाओं में लोकप्रिय

GRWM का मतलब ‘गेट रेडी विद मी’ है। यह सोशल मीडिया पर खासकर युवाओं के बीच लोकप्रिय वीडियो फॉर्मेट है। इसमें लोग अपने कपड़े, मेकअप और एक्सेसरीज दिखाते हैं और वीडियो के जरिए अपनी बात भी शेयर करते हैं। पीएम मोदी ने युवाओं से इसी ट्रेंड के जरिए हैंडलूम को प्रमोट करने की अपील की।

पारंपरिक कलाएं विलुप्ति के कगार पर

भारत में कई पारंपरिक हैंडलूम कलाएं धीरे-धीरे विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। इनमें हिमरू, कोडाली करुप्पुर, बावनबुट्टी और पटोला जैसी बुनाई शैलियां शामिल हैं। हिमरू बुनाई में रेशम और कपास के धागों से खूबसूरत डिजाइन तैयार किए जाते हैं। 

अस्तित्व बचाने की चुनौती बढ़ रही है

वहीं बिहार की बावनबुट्टी अपनी 52 खास मोटिफ्स के लिए जानी जाती है। गुजरात का पटोला अपनी डबल इकत तकनीक के लिए प्रसिद्ध है। आधुनिक और सस्ते मशीन से बने कपड़ों के बढ़ते चलन के कारण इन पारंपरिक कलाओं के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती बढ़ रही है।

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