Action to ensure the security of US troops

अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, IRGC के कई ठिकानों को बनाया निशाना

Written by:

Yug Nayyar

Last Updated: July 30 2026 05:15:37 PM

अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, IRGC के कई ठिकानों को बनाया निशानाअमेरिकी सैनिकों, व्यापारिक जहाजों और खाड़ी देशों की सुरक्षा हेतु कार्रवाई

अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला irgc के कई ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, IRGC के कई ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी सैनिकों, व्यापारिक जहाजों और खाड़ी देशों की सुरक्षा हेतु कार्रवाई

अबादान, बंदर अब्बास, बुशेहर और अबू मूसा, किश व केश्म द्वीपों पर धमाके

केश्म द्वीप पर रिहायशी इमारत हमले की चपेट में आई, परिवार बना निशाना

वहीं अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बढ़ गया है

इंटरनेशनल डेस्क

अमेरिका ने गुरुवार सुबह ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान में कई जगह एयरस्ट्राइक कर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यह हमला जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरान की ओर से मिसाइल हमले की कोशिश के बाद किया गया। अमेरिका ने बताया कि हमलों में सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने, तटीय रक्षा केंद्र और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।  CENTCOM के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों, व्यापारिक जहाजों और खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए की गई। 

ईरान के कई इलाकों में धमाकों की आवाजें

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिका अब इसका कड़ा जवाब देगा। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अबादान, बंदर अब्बास, बुशेहर और अबू मूसा, किश व केश्म द्वीपों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं। केश्म द्वीप पर एक रिहायशी इमारत भी हमले की चपेट में आई, जहां एक परिवार के कई लोगों के मारे जाने और घायल होने की खबर है।

संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी तनाव बढ़ गया है। ईरान ने दावा किया है कि इस समुद्री क्षेत्र पर उसका नियंत्रण है और उसकी अनुमति के बिना जहाजों की आवाजाही नहीं हो सकती। वहीं, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। हालांकि गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 89.45 डॉलर प्रति बैरल तक फिसला। विशेषज्ञों का मानना है कि संघर्ष और बढ़ा तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

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